दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतल साथ रखने से हर बार पानी खरीदने पर बनने वाला प्लास्टिक कचरा कम होता है। प्याऊ और पीने के पानी के स्थानों से मुफ़्त पानी भरकर आप पैसे भी बचाते हैं और पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं।
स्टील की बोतल: मज़बूत होती है। इंसुलेटेड बोतल गर्मी में पानी को लंबे समय तक ठंडा रखती है।
प्लास्टिक की बोतल: हल्की होती है और दौड़ने या ट्रेकिंग में आसान रहती है। अच्छी गुणवत्ता की और खाद्य उपयोग के लिए बनी बोतल चुनें।
तांबे की बोतल: भारत में लोकप्रिय है। इसे नियमित रूप से साफ़ करें और निर्माता के निर्देशों का पालन करें।
काँच की बोतल: पानी का स्वाद नहीं बदलती, पर टूटने का डर रहता है।
शहर में घूमने या दफ़्तर जाने के लिए 500 से 750 मिलीलीटर की बोतल ठीक रहती है। लंबी यात्रा या ट्रेकिंग के लिए एक लीटर या उससे बड़ी बोतल लें। चौड़े मुँह वाली बोतल नल से भरने और अंदर से साफ़ करने में आसान होती है, जबकि पतले मुँह वाली बोतल से चलते-चलते पीना आसान होता है।
जब पानी की गुणवत्ता का पता न हो, तब फ़िल्टर वाली बोतल उपयोगी हो सकती है। फिर भी हर फ़िल्टर की क्षमता अलग होती है, इसलिए निर्देश पढ़ें और समय पर फ़िल्टर बदलें। अधिक जानकारी के लिए
क्या नल का पानी पीने योग्य है? पढ़ें।
बोतल को रोज़ धोएँ और पूरी तरह सूखने दें।
ढक्कन और रबर की सील अलग करके साफ़ करें, ताकि बदबू और गंदगी न जमे।
बोतल में पानी को कई दिन तक न रखें, हर बार ताज़ा पानी भरें।
निकलने से पहले Indowater के नक्शे पर अपने रास्ते के जल बिंदु देख लें।
बड़े शहरों के नक्शे भी मदद करेंगे। नल या प्याऊ पर बोतल का मुँह सीधे नल से न लगाएँ, ताकि अगले व्यक्ति के लिए भी पानी साफ़ रहे।