भारत में नल के पानी की गुणवत्ता शहर, मोहल्ले और पाइपलाइन की हालत के अनुसार बहुत अलग हो सकती है। कई जगहों पर नगरपालिका का पानी साफ़ करके भेजा जाता है, फिर भी पुरानी पाइपों या टंकियों में भंडारण के दौरान पानी दूषित हो सकता है। इसलिए बहुत से परिवार पानी उबालकर, फ़िल्टर करके या RO जैसे शोधक से साफ़ करके पीते हैं।
भारत में पीने के पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का मानक IS 10500:2012 लागू होता है। इसमें बैक्टीरिया, रसायनों और घुले हुए पदार्थों जैसे मापदंडों की सीमाएँ तय की गई हैं। मानक का पूरा पाठ
BIS की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुँचाने के लिए 2019 में शुरू किए गए
जल जीवन मिशन के बारे में भी आप सरकारी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
जिस नल या स्थान पर «पीने योग्य नहीं» लिखा हो, उसका पानी।
बगीचों की सिंचाई, सजावटी फव्वारों या तालाबों का पानी।
ऐसे कुएँ, हैंडपंप या झरने का पानी जिसकी जाँच की जानकारी उपलब्ध न हो।
जिस पानी का रंग, गंध या स्वाद असामान्य लगे।
उबालना: पानी को अच्छी तरह उबालने से अधिकांश कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। ठंडा करके साफ़ बर्तन में रखें।
फ़िल्टर वाली बोतल: यात्रा में उपयोगी है, पर हर फ़िल्टर सब कुछ नहीं हटाता। निर्माता के निर्देश पढ़ें।
घरेलू शोधक: घर में फ़िल्टर या RO शोधक का नियमित रखरखाव करें और समय पर कार्ट्रिज बदलें।
Indowater के नक्शे पर जल बिंदु पीने योग्य और पीने के अयोग्य श्रेणियों में दिखाए जाते हैं। यह जानकारी उपयोगकर्ताओं द्वारा दी जाती है, इसलिए नक्शे पर पीने योग्य बताए गए पानी के सचमुच सुरक्षित होने की गारंटी नहीं दी जा सकती। हमेशा मौके पर लगी सूचना देखें और संदेह होने पर पानी न पिएँ या उसे साफ़ करके पिएँ।
भारत में यात्रा करते समय अपनी
पानी की बोतल साथ रखें और भरोसेमंद जल बिंदुओं से उसे भरें। गर्मी और लू के दिनों में प्यास लगने से पहले ही थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।